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    सावधान! आपकी दवा पर असली-नकली का संकट:लखनऊ में 15 दिन में 72 करोड़ के सिंडिकेट से लेकर GST चोरी तक बड़े खुलासे

    14 hours ago

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    राजधानी में पिछले 15 दिनों में नकली और संदिग्ध दवाओं के खिलाफ हुई कार्रवाई ने दवा कारोबार पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ करोड़ों रुपये की कथित नकली दवा का नेटवर्क सामने आया, तो दूसरी तरफ जांच में यह भी खुलासा हुआ कि जिन 28 दवाओं को पहले नकली बताया गया था, उनमें से 27 लैब में असली निकलीं। इसके बाद एफएसडीए ने फर्जी बिलिंग, जीएसटी चोरी, बंद हो चुकी फर्मों के लाइसेंस और सॉफ्टवेयर का दुरुपयोग कर दवा बेचने वाले गिरोह पर शिकंजा कस दिया। लगातार तीन दिनों की कार्रवाई में 15.50 लाख रुपये की दवाएं जब्त हुईं, कई फर्में सील हुईं, 32 दवाओं के सैंपल जांच के लिए भेजे गए और पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। 23 जुलाई: 72 करोड़ की कथित नकली दवा पर सवाल एफएसडीए और एसटीएफ ने अगस्त-2025 में आगरा के फव्वारा चौक से 72 करोड़ रुपये की कथित नकली दवाएं पकड़ी थीं। इन दवाओं के 28 सैंपल केंद्रीय लैब भेजे गए। जांच रिपोर्ट आने पर 28 में से 27 दवाएं मानक के अनुरूप यानी असली पाई गईं। केवल एक दवा सब-स्टैंडर्ड मिली। रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया और शुरुआती दावों पर सवाल उठने लगे। 25 जुलाई: लखनऊ में 15.50 लाख की दवाएं जब्त एफएसडीए मुख्यालय की 18 औषधि निरीक्षकों की टीम ने अमीनाबाद और आसपास के क्षेत्रों में एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान 13 से अधिक दवा फर्मों की जांच की गई। जांच में सामने आया कि कई स्थानों पर बिना वैध दस्तावेज दवाओं की खरीद-बिक्री, क्रॉस बिलिंग और फर्जी ट्रांजेक्शन किए जा रहे थे। करीब 15.50 लाख रुपये की दवाएं जब्त की गईं। 32 दवाओं के सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए और कई फर्मों को सील कर दिया गया। 26 जुलाई: बंद फर्म के लाइसेंस से चल रहा था कारोबार अगले ही दिन जांच का दायरा और बढ़ा तो एफएसडीए को बड़े सिंडिकेट का पता चला। विभाग के अनुसार, बंद हो चुकी दवा फर्मों के ड्रग लाइसेंस और पुराने सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर फर्जी सेल्स इनवॉइस तैयार किए जा रहे थे। इसी के जरिए जीएसटी चोरी और संदिग्ध दवाओं की सप्लाई की जा रही थी। जांच के आधार पर अमीनाबाद कोतवाली में पांच आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। विभाग का कहना है कि पूरे नेटवर्क की वित्तीय जांच भी कराई जाएगी। क्या मिला जांच में? • बंद हो चुकी फर्मों के लाइसेंस का दुरुपयोग। • फर्जी सेल्स इनवॉइस और क्रॉस बिलिंग। • जीएसटी चोरी का नेटवर्क। • बिना वैध खरीद दस्तावेज दवा की सप्लाई। • संदिग्ध दवाओं के 32 सैंपल लैब भेजे गए। • 15.50 लाख रुपये की दवाएं जब्त। • पांच लोगों पर एफआईआर। सबसे बड़ा सवाल- क्या बाजार में नकली दवाएं हैं? जांच से यह साफ हुआ कि हर जब्त दवा नकली नहीं होती। कई मामलों में समस्या दवा की गुणवत्ता नहीं बल्कि उसके खरीद-बिक्री के तरीके, फर्जी बिलिंग और अवैध सप्लाई चैन की होती है। वहीं, लैब रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होता है कि दवा नकली (Spurious), सब-स्टैंडर्ड (Substandard) या मानक के अनुरूप है। ऐसे करें खुद की सुरक्षा • हमेशा लाइसेंसधारी मेडिकल स्टोर से ही दवा खरीदें। • दवा का पक्का बिल जरूर लें। • बैच नंबर, निर्माण और एक्सपायरी डेट जांचें। • पैकिंग या होलोग्राम में गड़बड़ी दिखे तो दवा न लें। • बिना डॉक्टर की सलाह के सोशल मीडिया या अनजान स्रोत से दवा न खरीदें। • दवा को लेकर संदेह होने पर तुरंत डॉक्टर या एफएसडीए से शिकायत करें।
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