Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    शंकराचार्य विवाद पर ब्रजेश पाठक बोले- चोटी खींचना महाअपराध है:जिसने भी खींची उसे महापाप लगेगा; सबकुछ लिखा जा रहा है

    4 hours ago

    1

    0

    शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद मामले में यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, ‘चोटी नहीं खींचना चाहिए था। जो भी दोषी है, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।’ ब्रजेश पाठक ने कहा, आपको (पुलिसकर्मियों) बल का प्रयोग करना है तो आपको अन्य संसाधन मिले हैं। लाठी लीजिए। लेकिन चोटी खींचना नहीं चाहिए था। चोटी खींचना महाअपराध है। देखिएगा महापाप लगेगा। हम तो हिंदू माइथोलॉजी में विश्वास करते हैं। सबकुछ खाता बही में लिखा जा रहा है। उन्हें बहुत पाप पड़ेगा। ब्रजेश पाठक टाइम्स नाउ कॉन्क्लेव में बोल रहे थे। उनसे माघ मेले में मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुए विवाद पर सवाल किया गया था। हालांकि उन्होंने शंकराचार्य का नाम नहीं लिया। डिप्टी सीएम का यह बयान ब्राह्मणों की नाराजगी के बीच डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर सोन सिंह यादव ने लिखा- सबके अलग-अलग विचार। योगीजी के विचार अलग हैं। वह तो उन्हें संत भी नहीं मानते, आचार्य भी नहीं मानते। वहीं, दूसरे यूजर ने लिखा- सरकार में कौन है? कार्रवाई कौन करेगा? इससे पहले डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने प्रयागराज में कहा था कि पूज्य शंकराचार्य जी के चरणों में प्रणाम करता हूं और उनसे प्रार्थना करता हूं कि स्नान करें। किसी भी पूज्य संत या शंकराचार्य जी का अपमान हुआ है तो इसकी जांच कराकर कार्रवाई करेंगे। हालांकि केशव शंकराचार्य से मिलने नहीं पहुंचे थे। भास्कर पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दे सकते हैं… योगी और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी पहले योगी की 2 बड़ी बातें जानिए… ‘हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं हो सकता’ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार, 13 फरवरी को विधानसभा में बात रखी। योगी ने कहा- हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता। कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। मैं भी नहीं। मेरा मानना है कि भारत के हर व्यक्ति को कानून को मानना चाहिए। अगर सपा के लोग उसे पूजना चाहते हैं तो पूजें। सीएम ने कहा- माघ मेले में जो मुद्दा नहीं था, उसे जानबूझकर मुद्दा बनाया गया। क्या हर व्यक्ति मुख्यमंत्री बनकर पूरे प्रदेश में घूम जाएगा? क्या कोई मंत्री का बोर्ड लगाकर घूम जाएगा? क्या कोई सपा का अध्यक्ष बनकर प्रदेश में घूम जाएगा? नहीं…। एक सिस्टम है, एक व्यवस्था है। ‘मेरे लिए भी वही कानून है, जो किसी आम व्यक्ति के लिए’ योगी ने कहा- भारत के सनातन धर्म में भी यही व्यवस्था है। सनातन धर्म में शंकराचार्य का पद सर्वोच्च और पवित्र माना जाता है। सदन की व्यवस्था देखिए, यहां भी परंपरा है। सदन नियम से संचालित होता है। माघ मेले में मौनी अमावस्या पर साढ़े 4 करोड़ लोग आए थे। सबके लिए एक व्यवस्था बनाई गई। कानून सबके लिए बराबर होता है। मेरे लिए भी वही कानून है, जो किसी आम व्यक्ति के लिए है। कोई व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं हो सकता। मेरा यह मानना है कि भारत के हर व्यक्ति को कानून मानना चाहिए। अब शंकराचार्य की 2 बड़ी बातें पढ़िए… शंकराचार्य की पहचान किसी राजनीतिक प्रमाणपत्र से नहीं होती शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शनिवार, 14 फरवरी को वाराणसी में कहा कि सनातन धर्म में शंकराचार्य की पहचान किसी राजनीतिक प्रमाणपत्र से नहीं होती। सरकार या कोई राजनीतिक दल यह तय नहीं करेगा कि कौन शंकराचार्य होगा। उन्होंने कहा, सनातन में ऐसी कोई परंपरा नहीं कि कोई मुख्यमंत्री या सरकार प्रमाणपत्र देकर शंकराचार्य नियुक्त करे। इन्होंने स्वामी वासुदेवानंद जी को शंकराचार्य का प्रमाणपत्र दिया। उन्हें हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने रोक रखा है। कोर्ट बार-बार कह रही है कि इन्हें शंकराचार्य न कहा जाए। अखिलेश के माथे अहंकार चढ़ा, वही आप पर भी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, जो अहंकार 2015 में अखिलेश के माथे पर चढ़ा था, वही अहंकार आप पर चढ़ गया है। अखिलेश तो बर्बाद हो गए। अब इनका हाल देखिएगा। परंपरा के तहत ही मुझे ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट को भी इसकी जानकारी दे दी गई है। सनातन धर्म में कोई भी संन्यासी शंकराचार्य के पद से ऊपर नहीं है। मौनी अमावस्या पर क्या हुआ था, जानिए 18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी पुलिस ने रोक दी। पुलिस ने उनसे पैदल संगम जाने को कहा। शंकराचार्य के शिष्य नहीं माने और पालकी लेकर आगे बढ़ने लगे। इस पर शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। पुलिस ने कई शिष्यों को हिरासत में ले लिया था। पुलिस ने एक साधु को चौकी में भी पीटा था। इससे शंकराचार्य नाराज हो गए थे और शिष्यों को छुड़वाने पर अड़ गए। अफसरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, हाथ जोड़े, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद पुलिस ने शंकराचार्य के कई और समर्थकों को हिरासत में ले लिया था। शंकराचार्य की पालकी को खींचते हुए संगम से 1 किमी दूर ले जाया गया। इस दौरान पालकी का क्षत्रप भी टूट गया। शंकराचार्य स्नान भी नहीं कर पाए। शंकराचार्य 28 जनवरी तक अपने शिविर के बाहर धरने पर रहे। फिर वाराणसी लौट आए। शंकराचार्य के शिष्यों और पुलिस की झड़प की तस्वीरें- अब जानिए यूपी में ब्राह्मण वोटर कितना निर्णायक प्रदेश में 9 से 11 फीसदी ब्राह्मण समाज की आबादी है। मौजूदा 75 जिलों में 31 में ब्राह्मण प्रभावी भूमिका में हैं। पूर्वांचल, मध्य और बुंदेलखंड में ब्राह्मण समाज जिसके साथ जाता है, उसी की ताजपोशी भी तय मानी जाती है। ब्राह्मण हमेशा से महत्वपूर्ण स्विंग वोटबैंक रहे हैं। ये मतदाता अक्सर चुनावों का रुख तय करते हैं। इसकी वजह भी है, ये सामाजिक-आर्थिक रूप से सशक्त हैं। मुखर होने की वजह से अन्य जातियों को भी प्रभावित करते हैं। जब भी ब्राह्मण वोटर किसी पार्टी या गठबंधन के साथ मजबूती से जुड़े, तो उस पार्टी को बड़ा फायदा हुआ। बस समस्या ये है कि ये कभी भी एक पार्टी के साथ लंबे वक्त तक स्थाई रूप से जुड़े नहीं रह सके। ओप इंडिया के अनुसार, बलरामपुर, बस्ती, संत कबीर नगर, महराजगंज, गोरखपुर, देवरिया, जौनपुर, अमेठी, वाराणसी, चंदौली, कानपुर नगर, कानपुर देहात, प्रयागराज, जौनपुर, बांदा, बलिया और सुल्तानपुर समेत 31 जिलों की 115 सीटें ब्राह्मण प्रभाव वाली हैं। यहां 30 हजार से 1 1.60 लाख तक ब्राह्मण वोटर हैं। कब किस सियासी पार्टी के साथ गए 1980 तक कांग्रेस के बने रहे सारथी देश की आजादी के बाद 1980 तक ब्राह्मण मुख्य रूप से कांग्रेस के साथ रहे। यूपी में गोविंद वल्लभ पंत, हेमवती नंदन बहुगुणा और नारायण दत्त तिवारी जैसे ब्राह्मण नेता सीएम बने। ब्राह्मणों का सपोर्ट कांग्रेस की 'अम्ब्रेला कोएलिशन' (छत्र छाया वाला गठजोड़) की रीढ़ रहा। इसमें ब्राह्मण-मुस्लिम-दलित और अन्य समूह शामिल थे। 1985 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 269 सीटें मिली थीं। लेकिन, राम मंदिर आंदोलन और मंडल कमीशन से ब्राह्मणों का कांग्रेस से मोहभंग हो गया। 1990 में BJP की ओर शिफ्ट हुए ब्राह्मण मंडल कमीशन के चलते ब्राह्मण जनता दल से नाराज था। अयोध्या में मुलायम सिंह यादव ने कारसेवकों पर गोली चलवा दी थी। इन घटनाओं से ब्राह्मण समाज भी आंदोलित था। मंडल कमीशन से बंट चुके हिंदुओं को भाजपा ने एकजुट करते हुए राम मंदिर आंदोलन को तेज कर दिया। ब्राह्मण पहली बार बड़ी संख्या में भाजपा के साथ जुड़े। फायदा यह हुआ कि 1991 में 221 सीटों के साथ भाजपा पूर्ण बहुमत से यूपी की सत्ता में आ गई। 2007 में बसपा की ओर गया ब्राह्मण ‘हाथी नहीं गणेश है, ब्रह्मा-विष्णु-महेश है…’ इस नारे के साथ बसपा ने 2007 में ब्राह्मण समाज को पार्टी से जोड़ने पर जोर दिया। सतीश मिश्रा को पार्टी महासचिव बनाया। प्रदेश के अलग-अलग इलाकों के मजबूत ब्राह्मण नेताओं को पार्टी में शामिल कराया। जिले-जिले में ब्राह्मण सम्मेलन कराए। फायदा यह हुआ कि भाजपा छोड़कर ब्राह्मण बसपा के साथ चले गए। बसपा को फायदा यह हुआ कि लंबे अंतराल के बाद बसपा 206 सीटों के साथ अकेले पूर्ण बहुमत से सत्ता में आ गई। 2012 में सपा के साथ गए 2012 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर ब्राह्मण समाज शिफ्ट हुआ। इस बार 19% ब्राह्मणों की पहली पसंद सपा बनी। सपा 224 सीटों के साथ यूपी की सत्ता में लौटी। लेकिन, ब्राह्मणों का झुकाव भाजपा की ओर हो चुका था। 2014 में भाजपा के पक्ष में लामबंद 2014 में ब्राह्मण भाजपा के साथ पूरी तरह से लामबंद रहे। इसका फायदा यह हुआ कि पार्टी लोकसभा की 71 सीटें जीतने में कामयाब रही। फिर 2017, 2019, 2022 और 2024 में ब्राह्मण पूरी तरह से भाजपा के पक्ष में समर्पित रहे। सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (सीएसडीएस) की रिपोर्ट बताती है कि 2017 में 83%, तो 2022 के विधानसभा में 89% ब्राह्मणों का वोट भाजपा को मिला था। 2024 से शुरू हुई नाराजगी, दिखने लगी शिफ्टिंग 2024 में ब्राह्मण वोटर एक बार फिर शिफ्ट होता दिखने लगा। भाजपा को भले ही 79% ब्राह्मणों का वोट मिला हो, लेकिन उनका 16% वोट महागठबंधन को भी गया। यह दिखाता है कि ब्राह्मण का भाजपा से मोहभंग हो रहा। इसका असर भी दिखा। महागठबंधन की सीटों की संख्या 43 हो गई और भाजपा गठबंधन 37 सीटों पर ही रुक गई। ब्राह्मणों की नाराजगी चुनाव तक बनी रही तो 40 से 50 सीटें हार सकती है 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश में 114 सीटें ऐसी थीं, जिस पर जीत–हार का अंतर 10 हजार से कम था। इसमें से 15 सीटों पर तो एक हजार से भी कम का मार्जिन था। इन 114 सीटों में भाजपा 64 और उसके सहयोगी दलों में रालोद, निषाद पार्टी को 2–2 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं, सपा 35 सीटों पर जीती थी। बसपा व कांग्रेस की 1–1 सीटें थीं। प्रदेश में ब्राहणों की आबादी 9 से 11 प्रतिशत है। वहीं विधानसभा में औसत वोटरों की संख्या 2.20 लाख थी। इस हिसाब से अनुमान लगाएं तो 10 प्रतिशत ब्राह्मणों की नाराजगी से 1 प्रतिशत वोट स्विंग होगा। मतलब दो हजार वोट भाजपा से कटेंगे। यदि 2022 की तरह ही टक्कर होती है तो सीधे 12 से 15 सीटों का नुकसान भाजपा को हो सकता है। यदि 30 प्रतिशत भी ब्राह्मण वोट भाजपा से शिफ्ट हुआ तो लगभग 50 सीटों का नुकसान भाजपा को हो सकता है। -------------------- यह खबर भी पढ़िए:- पुलिस की स्कार्पियो पेड़ से टकराई, दरोगा की मौत:महिला समेत 4 पुलिसवाले घायल, दबिश देकर गोरखपुर लौट रहे थे महराजगंज में गोरखपुर पुलिस टीम की तेज रफ्तार स्कॉर्पियो पेड़ से टकरा गई। हादसे में दरोगा की मौत हो गई। महिला दरोगा, सीनियर एसआई, दो कॉन्स्टेबल और चालक घायल हैं। पुलिस टीम कुशीनगर से दबिश देकर गोरखपुर लौट रही थी। शुरुआती जांच में पता चला है कि हाईवे पर ड्राइवर को झपकी आ गई, जिससे स्कॉर्पियो डिवाइडर पर चढ़ गई, फिर पेड़ से जा भिड़ी। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग पहुंचे और सभी को गाड़ी से बाहर निकालकर अस्पताल भिजवाया। पढ़ें पूरी खबर…
    Click here to Read more
    Prev Article
    TTE ने चलती ट्रेन में युवती से किया रेप:गोरखपुर में बोली- सीट दिलाने के बहाने केबिन में ले गया, दरवाजा बंद कर किया दुष्कर्म
    Next Article
    रायबरेली में लाखों की चोरी का खुलासा:आरोपी गिरफ्तार, 7 लाख के जेवर-नकदी बरामद

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment