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    शिक्षा को लूट से मुक्त कराने का धरना शुरू:समाजसेवी हरवीर भारतीय की मांग, NCERT बुक लागू हो, ड्रेस कोड न बदले

    1 hour ago

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    समाजसेवी हरवीर भारतीय ने कासगंज के गांधी मूर्ति पर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया है। यह धरना शिक्षा को 'लूट से मुक्त' कराने के अभियान के तहत किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि सभी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें लागू की जाएं और हर साल ड्रेस कोड न बदला जाए। धरना शुरू करने से पहले शहर में सोरों गेट से नदरई गेट तक एक मार्च निकाला गया। इसके बाद गांधी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर प्रदर्शन आरंभ किया गया। इस धरने में विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्य और शहर के लोग शामिल हो रहे हैं। हरवीर भारतीय ने बताया कि वे पिछले दो साल से 'शिक्षा को लूट से मुक्त करो' अभियान के तहत अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने इस दौरान शासन-प्रशासन को कई बार ज्ञापन भी दिए, लेकिन उनकी मांगें नहीं मानी गईं। इसी के चलते उन्हें अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू करना पड़ा है। इस धरने को स्थानीय निकाय सफाई कर्मचारी संघ के नेता सोनू भंडारी, प्रधान संघ के नेता शिव कुमार हमदर्द और एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक ह्यूमन राइट्स के जिला प्रभारी सुनील विजय ने भी समर्थन दिया है। हरवीर भारतीय ने पहले ही एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से प्रशासन को 26 फरवरी से अनिश्चितकालीन धरने पर जाने की सूचना दी थी। उनकी प्रमुख मांगों में हर स्कूल में एनसीईआरटी की किताबें लागू करना और ड्रेस कोड को कम से कम 3 से 5 साल में बदलना शामिल है। उन्होंने निजी पब्लिकेशन की किताबों को बाध्यकारी न बनाने की भी मांग की। धरने में शामिल प्रधान संघ के नेता शिव कुमार हमदर्द ने कहा कि शिक्षा को पूरी तरह से व्यापार बना दिया गया है। उन्होंने इसे हर वर्ग की परेशानी बताते हुए बच्चों की पढ़ाई के नाम पर चल रही 'लूट' को बंद करने की मांग की। शिक्षक सुखवीर सिंह यादव ने भी इस मुहिम का समर्थन करते हुए कहा कि वे महंगी किताबों से पीड़ित आम लोगों के साथ हैं। उन्होंने जोर दिया कि स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें लगाई जाएं और निजी क्षेत्र की किताबें न लगाई जाएं, ताकि गरीब बच्चों को भी शिक्षा मिल सके। वहीं धरने में समर्थन दे रहे शामिल स्थानीय निकाय सफाई कर्मचारी के नेता सोनू भण्डारी ने कहा शिक्षा में लूट चल रही है। हर वर्ष किताबें चेंज करदी जाती है। और किताबो कि 60 परसेंट कमीशन स्कूल ले रहे है। और बच्चों कि किताबें बहुत महंगी है बच्चो को पढ़ाना मुश्किल हो गया है।
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