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    शिक्षक से मारपीट में 4 रिटायर्ड पुलिसकर्मियों की सजा बरकरार:गाजीपुर कोर्ट ने अपील खारिज की, 35 साल पहले 1991 में हुई थी वारदात

    9 hours ago

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    गाजीपुर में 35 साल पुराने शिक्षक से मारपीट के मामले में चार सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों को अदालत से राहत नहीं मिली। एससी/एसटी एक्ट के विशेष न्यायाधीश संजय के लाल की अदालत ने चारों आरोपियों की दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखते हुए निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दाखिल अपील खारिज कर दी। यह मामला वर्ष 1991 का है, जिसमें तत्कालीन मरदह थाने के पुलिसकर्मियों पर राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक कुबेरनाथ सिंह के साथ मारपीट कर उन्हें घायल करने का आरोप लगा था। अभियोजन के अनुसार, घटना के बाद शिक्षक की ओर से पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। मामले की विवेचना पूरी होने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान चार पुलिसकर्मियों को दोषी पाया गया। इसके बाद आरोपियों ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील दाखिल की थी। विशेष न्यायाधीश की अदालत ने अब इस अपील को खारिज करते हुए दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा है। 1991 में शिक्षक से मारपीट का मामला अभियोजन पक्ष के मुताबिक, वर्ष 1991 में तत्कालीन मरदह थाने में तैनात पुलिसकर्मियों पर शिक्षक कुबेरनाथ सिंह के साथ मारपीट करने का आरोप लगा था। मारपीट में शिक्षक घायल हुए थे। कुबेरनाथ सिंह राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक थे। घटना के बाद उन्होंने संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने मामले की विवेचना की और जांच पूरी होने के बाद आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया गया। इसके बाद लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया में मामले की सुनवाई जारी रही। निचली अदालत ने दोषी ठहराया था मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष अभियोजन की ओर से उपलब्ध साक्ष्य और गवाहों के बयान रखे गए। सुनवाई पूरी होने के बाद चार पुलिसकर्मियों को मामले में दोषी ठहराया गया। निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ आरोपियों की ओर से अपील दाखिल की गई। आरोपियों ने दोषसिद्धि और सजा को चुनौती देते हुए मामले में राहत की मांग की थी। विशेष अदालत ने अपील खारिज की एससी/एसटी एक्ट के विशेष न्यायाधीश संजय के लाल की अदालत ने अपील पर सुनवाई की। अदालत ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, गाजीपुर के 1 फरवरी 2025 के निर्णय का परीक्षण करने के बाद उसमें हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। विशेष अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए आरोपियों की अपील खारिज कर दी। इस फैसले के साथ चारों सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों की दोषसिद्धि और सजा कायम रही। 4 रिटायर्ड पुलिसकर्मी दोषी अदालत के फैसले में दोषी ठहराए गए पुलिसकर्मियों में एसआई सुदमा यादव, कांस्टेबल धर्मदेव तिवारी, कांस्टेबल भीम सिंह और कांस्टेबल ईश नारायण लाल शामिल हैं। चारों अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अभियोजन के मुताबिक, घटना के बाद शिक्षक के खिलाफ भी दो मुकदमे दर्ज किए गए थे। बाद में इन मामलों की विवेचना सीबीसीआईडी को सौंपी गई। जांच में इन मुकदमों को गलत पाए जाने का उल्लेख अदालत के समक्ष किया गया। इसी प्रकरण में वर्ष 1993 में तत्कालीन थानाध्यक्ष एमपी काजी समेत पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज होने की बात सामने आई थी। मामले की न्यायिक प्रक्रिया लंबे समय तक चलने के बाद अब विशेष अदालत ने चार सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों की अपील खारिज कर निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा है।
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