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    टेलर का बेटा बना यूपी पुलिस परीक्षा का टॉपर:बोला- पापा ने मजदूरी करने को कहा, तो मां ने रोका; 2 बहनें भी पुलिस में

    5 hours ago

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    'गरीबी में पापा ने मुझसे 13 साल की उम्र में ही मजदूरी करने को कहा था। लेकिन, मां ने समझाया तो पापा ने मेरी पढ़ाई चलने दी। इसके बाद मन लगाकार पढ़ाई की। हाईस्कूल-इंटर में अच्छे नंबर लाया। 12वीं के बाद ही पुलिस में जाने का मन बनाया। इस बीच CISF में सिलेक्शन भी हुआ, लेकिन जॉइन नहीं किया। मेरी मेहनत रंग लाई। यूपी पुलिस में टॉप कर गया। अब अपने प्रदेश में रहकर सेवा करूंगा।' यह कहना है, बागपत में रहने वाले यूपी पुलिस कॉन्स्टेबर परीक्षा के टॉपर सारंग प्रजापति का। उनके 300 में से 276 नंबर आए हैं। दैनिक भास्कर की टीम सारंग से मिलने उनके घर पहुंची। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पिता घर में कपड़ों की सिलाई करते हैं जिला मुख्यालय से करीब 42 किमी दूर दोघट कस्बे में सारंग का घर है। मां बबली प्रजापति गृहिणी और पिता लोकेंद्र टेलर हैं। वह घर पर ही कपड़े सिलने का काम करते हैं। 2 बड़ी बहनें आशा और आभा हैं। आशा यूपी पुलिस में हैं। उनकी तैनाती उन्नाव में है, जबकि छोटी बहन आभा CISF में हैं। वो केरल में हैं। 20 साल के सारंग पढ़ाई में शुरुआत से ही तेज रहे हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बाद भी उन्होंने मेहनत से पढ़ाई की। पिता बोले- पत्नी नहीं समझती तो बेटा मजदूर ही बनता पिता लोकेंद्र बताते हैं- हम लोग बहुत गरीब थे। जब बेटा 13 साल का था, तब मैंने उसे मोहल्ले की ही किराने की दुकान में मजदूरी के लिए भेजने का मन बनाया था। लेकिन, पत्नी और दोनों बेटियों के समझाने पर मैंने उसकी पढ़ाई नहीं रोकी। इसके बाद सारंग हाईस्कूल में 81.5% और इंटरमीडिएट में 78% नंबर लाया। मां बोलीं- घर में दूध होता था, लेकिन बच्चों नहीं पिला पाते थे सारंग की मां बबली का कहना है- हमने कड़ी मेहनत के बाद अपने बच्चों को पढ़ाकर कामयाब बनाया है। मैंने शादी के बाद से ही घर में जानवर पाले। लेकिन, अपने बच्चों को पीने के लिए दूध क्या र चाय भी नहीं दे पाती थी। सारा दूध बेचकर बच्चों का पालन-पोषण होता था। बच्चों के खाने के लिए सब्जी का इंतजाम करना भी बहुत बड़ी चुनौती होती थी। लेकिन, भगवान पर भरोसा था। बच्चों की कड़ी मेहनत ने परिवार को आगे बढ़ाया। मेरे जैसे बच्चे भगवान सभी को दे। सारंग बोले- बचपन में ही वर्दी से प्यार हो गया था सारंग कहते हैं- मैंने पुलिस सेवा में जाने का लक्ष्य बना लिया था। बचपन में पुलिसकर्मियों को जब गांव में आते देखता था, तभी वर्दी से प्यार हो गया था। मेरा करीब 6 महीने पहले आईटीबीपी में सिलेक्शन हो गया था। लेकिन, यूपी पुलिस में जाने के लिए उधर जॉइन नहीं किया। पुलिस में भर्ती होने की चाह में मैंने वो नौकरी भी छोड़ दी। आखिरकार मेरा सपना पूरा हुआ है। अब सिर्फ मेडिकल होना बाकी है। एक साल से सोशल मीडिया से दूर रहा सारंग का कहना है- पुलिस भर्ती की तैयारी के दौरान मैंने सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी। तभी मुझे सफलता मिली। पिछले एक साल से मैं सोशल मीडिया से दूर था। सोशल मीडिया रील को देखकर भटकाव महसूस होता था। मैं अपने रास्ते में कोई रुकावट नहीं चाहता था। पढ़ाई के लिए ऑनलाइन कोर्सेस का सहारा लिया। परीक्षा की तैयारी में रोजाना करीब 12 घंटे जुटा रहा। जरूरत पड़ने पर पिता का उनके काम मे भी हाथ बंटाया। ------------------------- ये खबर भी पढ़ें सुप्रीम कोर्ट बोला- बच्चों को इंटरनेट से दूर रखना बेतुका, बाल यौन शोषण कंटेंट हटाने के लिए डेटाबेस बने सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इंटरनेट इस्तेमाल करना हर व्यक्ति, यहां तक कि हर उम्र के बच्चे का मौलिक अधिकार है। बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह दूर रखना बेतुका होगा। कोर्ट ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और उनकी आजादी, दोनों जरूरी हैं। पूरी खबर पढ़ें
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