Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    दालमंडी में खाली कराए गए थे 200 से ज्यादा कोठे:70 के दशक में शराब और वेश्यावृत्ति बढ़ गई थी, आंदोलन में 72 तवायफें हुईं गिरफ्तार

    1 day ago

    1

    0

    वाराणसी की दालमंडी गली चौड़ीकरण प्रोजेक्ट तेजी से चल रहा है। कभी तवायफों का अड्डा रहा दालमंडी अब अपने विकसित रूप में दिखाई दे रही है। जद्दन बाई, कोयला बाई, गौरी ये वो नाम हैं जिन्हे यहां के बुजुर्ग आज भी लेते हैं। लेकिन 70 के दशक में बढ़ी वेश्यावृत्ति और शराब पीकर हंगामे ने इस तवायफों के कोठे खाली करवा दिए। इसमें चौक थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर रणजीत सिंह का नाम हमेशा लिया जाएगा, जिन्होंने दालमंडी के लोगों की आवाज पर एक्शन लिया और सबसे पहले वेश्यावर्ती करवा रहे कोठों को बंद करवाया और उसमें ताला लगवाया। तवायफों ने एक संगठन बनाकर इस कार्रवाई का विरोध किया। सड़क पर उतरीं और आंदोलन किया। जिसमें 72 गिरफ्तार की गई और बाद में जमानत पर छूटीं, लेकिन किसी भी प्रकार छूट नहीं मिली और कोठों को लगातार बंद करवाया गया। 80 के दशक के आते-आते सभी कोठे दालमंडी में बंद हो चुके थे। ऐसे में दैनिक भास्कर ने वाराणसी की दालमंडी में तवायफों को हटाने की जरूरत क्यों पड़ी और कैसे लोगों ने कोठों को खाली कराया? इस संबंध में वहां के रहने वाले लोगों और इस कार्रवाई में मौजूद रहे बुजुर्गों से बात की और इस पूरे घटनाक्रम को जाना। पढ़िए पूरी रिपोर्ट … अब जानिए लोकतंत्र सेनानी बादशाह अली ने दालमंडी में तावायफों पर की गई कार्रवाई के बारे में क्या बताया ?… 70 के दशक में फैल गई थी गंदगी लोकतंत्र सेनानी बादशाह अली ने बताया- 70 के दशक में यहां गंदगी बहुत ज्यादा फैल गई थी। शराब बहुत ज्यादा दालमंडी की तंग गलियों में चलने लगी थी। कुंजीगर टोले में एक सरकारी देशी शराब का ठेका हुआ करता था। इसके अलावा अवैध रूप से भी शराब बिकने लगी थी, जिससे यहां असामाजिक तत्व आने लगे। सड़क और गलियों में शराब चलने लगी। इसके बाद लोगों को दिक्कतें आनी शुरू हो गई। ऐसे में हम लोगों ने मिलकर एक संगठन बनाया। और इन तवायफों को यहां से हटाने का प्रण लिया। चौक इन्स्पेक्टर ने की मदद बादशाह अली ने बताया - उस समय चौक थाने पर एक इंस्पेक्टर हुआ करते थे रणजीत सिंह। उनसे मदद मांगी और उन्होंने हमारा बहुत सहयोग किया। इसके बाद 70 से लेकर 71 तक यहां कोठों को खाली कराया गया। जिसमें लगभग 200 से अधिक कोठों को खाली कराया गया। कुछ कोठे साल 1975 के बाद भी खाली हुए। लेकिन हम लोगों ने उन्हें यहां फिर पैर नहीं जमाने दिया और दोबारा वापस नहीं आने दिया। तवायफों ने बनाया संगठन, 72 हुईं गिरफ्तार बादशाह अली ने बताया - उस समय जब हम लोगों ने यह कार्रवाई शुरू कराई तो तवायफ और उनके लोगों ने एक संगठन बनाया। हम लोगों को और पुलिस को कोठा खाली कराने में काफी दिक्कतों का सामान करना पड़ता था। लेकिन विरोध और प्रदर्शन करने में 72 तवायफों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। लेकिन हम लोगों ने हिम्मत नहीं हारी और उन्हें खाली करवाकर छोड़ा। वो लोग निजी मुचलके पर छूट गयीं और फिर आंदोलन चलाया पर उनकी नहीं चली। ठेका था लेकिन लोग डरते थे बादशाह अली ने बताया - कुंजीगर टोला में शराब का ठेका काफी पुराना था। लेकिन लोगों की हिम्मत दालमंडी गली में खड़े होकर पीने की नहीं थी। लेकिन कुछ तवायफों के दम पर लोग खुलेआम गलियों में शराब पीने लगे थे। पुलिस से उसकी भी शिकायत हुई थी। लेकिन वह बंद नहीं हुआ। लेकिन जब मंदिर से 100 मीटर के दायरे में शराब ठेका बंद कराने का ऑर्डर आया तो वह बंद हुआ। विरोध हुआ पर इन्स्पेक्टर के आगे किसी की नहीं चली बादशाह अली ने बताया - हम लोगों ने जब यह काम शुरू कराया तो हमारा विरोध कई लोगों ने किया। तवायफों ने संगठन बनाया और हमारे खिलाफ अफवाहें उड़ानी शुरू कर दी। पर हम लोगों ने हिम्मत नहीं छोड़ी और उस वक़्त के जो चौक इन्स्पेक्टर थे रणजीत सिंह उन्होंने हम लोगों की हर कदम मदद किया। अब जानिए इसी इलाके के अस्करी राजा सईद ने क्या बताया? जिन्होंने बचपन में देखा दालमंडी का कोठा … राजा-महराजा आते थे देखने मुजरा वाराणसी के चौक इलाके में साल 1928 से चल रही जिलट वाच शॉप के घराने के अस्करी राजा सईद ने बताया - दालमंडी में 70 प्रतिशत मकानों में तवायफों का कोठा चलता था। ये घर उन लोगों के थे जो कलकत्ता और मुंबई रहते थे। उन घरों में इन्होने अपनी रिहाईश बनाई थी। जितनी भी तवायफें थी। उनमें 60 प्रतिशत में मुजरे होते थे। उसमें राजा-महाराजा आते थे। जो तवायफों का मुजरा देखने आते थे। वेश्यावृत्ति से शुरू हुआ हंगामा अस्करी राजा सईद ने बताया - जो बचे हुए थे कोठे उनमे वैश्यावृत्ति होती थी। ये कोठे दालमंडी में 70 के दशक में गंदगी फैला रहे थे। ऐसे में उस वक्त के इंस्पेक्टर रणजीत सिंह ने इन्हे भार निकाल फेका और सभी को हटाकर दालमंडी को खाली कराया। इमरजेंसी के दौरान यह ऑपरेशन चलाया उन्होंने और वेश्यावृत्ति एकदम खत्म हो गई। कुछ कोठों पर 85 से 90 तक मुजरा हुआ करता था वो भी अब खत्म हो गया। गौरी के कोठे पर लगता था मजमा अस्करी राजा सईद ने बताया - हमारी दुकान मिर्जा अच्छू के कटरे के पास थी। उसी बिल्डिंग में गौरी का कोठा था। साल 1976 तक कोठे बंद होने के बाद भी 80 के दशक में यह कोठा चल रहा था। जहां हर शनिवार और रविवार को मिलिट्री के लोग आया करते थे। और मुजरा सुनकर रात में लौट जाते थे। यह सूचना पुलिस को मिली तो उन्होंने छापेमारी की और सभी को हिरासत में ले लिया। पुलिस जब उन्हें लेकर नीचे आयी तो दुकानदार में हंसी-मजाक होने लगा जिसके बाद मिल्ट्री के लोगों और पुलिस में खींचतान हुई और मिल्ट्री के लोग वहां से किसी तरह निकल गए। पुलिस की वर्दी और बैच की थी दुकान अस्करी राजा सईद ने बताया - वो वक़्त हमें अच्छे से याद है। हमारी दूकान में उस समय पुलिस का बैच, वर्दी और सभी सामान मिलते थे। बड़े अधिकारी हमारी शॉप पर आते थे और हमारे ताऊजी और पिता जी सभी उनसे इस गंदगी को हटाने की रिक्वेस्ट करते थे। लेकिन कोई हटा नहीं पा रहा था। दुकानदारी के समय मुजदरा सुनने वाले हाथों में गजरा लेकर कोठा देखा करते थे। ये दालमंडी का हाल था।
    Click here to Read more
    Prev Article
    लोनी प्रकरण में निष्पक्ष जांच की मांग, डीएम को ज्ञापन:मेरठ में आजाद अधिकार सेना ने कहा- भड़काऊ वीडियो और बयानबाजी करने वालों पर हो कार्रवाई
    Next Article
    एटा में दिव्यांगों ने अपनी समस्याओं पर की बैठक:उपजिलाधिकारी ने सुनी शिकायतें, पेंशन 5 हजार करने की मांग

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment