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    दादी को कांवड़ में बैठाकर निकला 'श्रवण' शिवभक्त:हापुड़ का युवक हरिद्वार से ला रहा गंगाजल, शिव चौक पर बना आकर्षण

    16 hours ago

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    कांवड़ यात्रा-2026 के बीच मुजफ्फरनगर के शिव चौक पर शुक्रवार सुबह आस्था, सेवा और संस्कार की अनूठी मिसाल देखने को मिली। हापुड़ निवासी शिवभक्त प्रशांत राणा अपनी दादी शारदा देवी को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए। उनकी 'श्रवण कांवड़' शिव चौक पर श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन गई। अनोखी कांवड़ को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग रुकते रहे और फोटो-वीडियो बनाते नजर आए। प्रशांत राणा ने बताया कि उनकी कोई व्यक्तिगत मनोकामना नहीं है। उनका उद्देश्य सिर्फ अपनी दादी को हरिद्वार में गंगा स्नान कराना और उन्हें कांवड़ यात्रा का अनुभव कराना था। इसी सोच के साथ उन्होंने दादी को कांवड़ में बैठाकर यात्रा शुरू की। उन्होंने कहा कि भगवान शिव से उनकी यही प्रार्थना है कि परिवार में सुख-शांति बनी रहे और उनकी दादी को लंबी आयु व उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिले। 22 शिवभक्तों की टोली, लेकिन सबसे अलग 'श्रवण कांवड़' प्रशांत ने बताया कि उनकी टोली में कुल 22 शिवभक्त शामिल हैं। सभी श्रद्धालु अपनी-अपनी कांवड़ लेकर चल रहे हैं, लेकिन पूरी टोली में केवल वही अपनी दादी को कांवड़ में बैठाकर यात्रा कर रहे हैं। इस वजह से उनकी कांवड़ पूरे रास्ते लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। संतुलन के लिए दोनों पलड़ों में बराबर वजन प्रशांत ने बताया कि उनकी दादी का वजन करीब 45 किलोग्राम है। इसलिए कांवड़ का संतुलन बनाए रखने के लिए दूसरे पलड़े में भी लगभग 45 किलोग्राम वजन रखा गया है। इसमें गंगाजल, कलश और अन्य पूजन सामग्री शामिल है। दोनों ओर समान वजन होने से यात्रा संतुलित और सुरक्षित तरीके से पूरी की जा रही है। दादी बोलीं- बुजुर्गों की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं शारदा देवी ने अपने पौते की सेवा भावना पर खुशी जताते हुए कहा कि हर युवा को अपने माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है और यही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है। 'श्रवण कांवड़' को देखने के लिए रास्ते भर श्रद्धालु रुकते रहे। कई लोगों ने प्रशांत और उनकी दादी के साथ फोटो और वीडियो भी बनाए। कांवड़ यात्रा के बीच यह अनोखा दृश्य लोगों को न सिर्फ आस्था, बल्कि परिवार के प्रति समर्पण और बुजुर्गों के सम्मान का संदेश भी देता नजर आया।
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