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    उत्तर प्रदेश में कमर्शियल वाहनों पर वन टाइम टैक्स:संभल ARTO बोले- 7.5 टन तक के वाहनों के लिए नियम बदले, कन्वर्जन भी आसान

    18 hours ago

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    उत्तर प्रदेश सरकार ने छोटे व्यवसायियों और टैक्सी मालिकों की वर्षों पुरानी समस्या का समाधान करते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। नए संशोधन के तहत, 1 फरवरी 2026 से 7.5 टन तक के कमर्शियल वाहनों पर अब वन टाइम टैक्स (OTT) का प्रावधान लागू होगा। संभल के एआरटीओ अमिताभ चतुर्वेदी ने रविवार को बताया कि इस व्यवस्था से वाहन मालिकों को हर तीन महीने में टैक्स जमा करने की भागदौड़, चालान का डर और बकाया नोटिस की चिंता से मुक्ति मिलेगी। पहले टैक्सी और छोटे कमर्शियल वाहन मालिकों को सीट और अवधि के अनुसार तिमाही या सालाना टैक्स देना पड़ता था। समय पर टैक्स जमा न होने पर चालान, नोटिस और वाहन जब्त होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। अब 7.5 टन ग्रॉस व्हीकल वेट (GVW) तक की सभी गाड़ियां, जिनमें छोटी टैक्सी, हैचबैक, मल्टी-यूटिलिटी वाहन और मिनी बसें शामिल हैं, वन टाइम टैक्स के दायरे में आ गई हैं। इसका अर्थ है कि एक बार टैक्स जमा करने के बाद वाहन मालिक जीवन भर के लिए निश्चिंत हो जाएंगे। इसके साथ ही, कमर्शियल से प्राइवेट या प्राइवेट से कमर्शियल वाहन में रूपांतरण (कन्वर्जन) की प्रक्रिया भी आसान कर दी गई है। पहले जहां रूपांतरण पर अतिरिक्त टैक्स का बोझ पड़ता था, अब इसे नाममात्र के अतिरिक्त शुल्क के साथ पूरा किया जा सकेगा। योगी सरकार का यह कदम केवल टैक्सी मालिकों को राहत देने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को भी मजबूत करेगा। बार-बार की वसूली, नोटिस और बकाया की लंबी फाइलों से राजस्व विभाग को भी छुटकारा मिलेगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा। उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन इकोनॉमी की ओर ले जाने के लक्ष्य में यह फैसला एक मजबूत कड़ी माना जा रहा है। छोटे व्यवसायियों को राहत देकर सरकार ने साफ संदेश दिया है कि विकास का पहिया तभी तेज़ घूमेगा जब नियम सरल और व्यवस्था साफ होगी। योगी सरकार का यह फैसला सच में एक “गेम चेंजर” साबित हो सकता है, जहां राहत भी है, पारदर्शिता भी और विकास की रफ्तार भी।
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