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    वाराणसी के हरिश्चंद्र घाट पर मसाने की होली:नरमुंड की माला डालकर निकले अघोरी, डीजे पर झूमते युवाओं ने खेली चिता भस्म

    3 hours ago

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    वाराणसी के हरिश्चंद्र घाट पर शुक्रवार दोपहर मसाने की होली का आगाज हुआ। डीजे और गानों के बीच हरिश्चन्द्र घाट पर बड़ी संख्या में लोग अघोर वेश भूषा में पहुंचे और चिता की राख के साथ होली खेली। शरीर पर चिता भस्म लपेटे और गले में नरमुंडों की माला पहन कर पहुंचे। अलग-अलग वेशभूषा में जब सैकड़ों लोग होली में शामिल हुए तो नजारा ही बदल गया। मसाने की होली देखने देश भर से हजारों लोग काशी पहुंचे हैं, वहीं घाट पर बड़ी संख्या में देशी विदेशी लोग पहुंचे हैं। सुरक्षा के लिए हरिश्चन्द्र घाट पर सुबह से ही पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। शुक्रवार दोपहर 12 बजे से ही मसाने की होली के लिए लोगों का जमावड़ा हरिश्चंद घाट पर शुरू हो गया। लोग नरमुंड की माला और गले में सर्प लटकाकर इस होली में शामिल हुए। 1 बजे से हरिश्चंद्र घाट पर मसाने की होली शुरू हुई। इस होली में शामिल लोग डीजे बजाकर और देवी देवताओं के स्वरुप में करतब दिखाते हुए पूरे जोश में नज़र आए। चिता भस्म की होली कवर करने के लिए बड़ी संख्या में यूट्यूबर भी पहुंचे थे, जिन्होंने ड्रोन कैमरे से इस विचित्र कार्यक्रम को कवर किया। अब शनिवार को चिता भस्म की परंपरागत होली मणिकर्णिका घाट पर खेली जाएगी। बता दें कि कई लोग मसाने की होली का विरोध कर रहे थे। हरश्चिंद्र घाट पर शुक्रवार को कपाली बाबा ने बाबा मसाननाथ के अभिषेक और आरती के बाद भस्म की होली शुरू हुई। घाट पर पालकी यात्रा निकाली गई। कपाली बाबा ने बताया कि मसाने की होली प्राचीन है और इनका उल्लेख परंपरागत प्रपत्रों एवं स्थानीय इतिहासकारों के अभिलेखों से प्राप्त होता है। अघोर परंपरा के लोग शिव के उपासक हैं। उनके लिए मसाने की होली खास होती है। पारंपरिक साक्ष्यों के अनुसार, मसाने की होली संगठित एवं उत्सवी स्वरूप में करीब 350 वर्षों पूर्व बाबा कालभैरव के तत्कालीन पीठाधिपति अघोरी उमानाथ, बाबा कीनाराम महाराज के प्रधान शिष्य बाबा बीजाराम और नाथ परंपरा के प्रसिद्ध संत योगी दीनानाथ के संयोजन में मसाने की होली शुरू हुई थी। मसाने की होली से जुड़ी अपडेट के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…
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