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    ऐसे कृत्यों को स्वीकार नहीं...हूतियों ने सऊदी पर बम बरसाया, भारत को जबरदस्त गुस्सा आया

    20 hours ago

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    भारत ने बुधवार को सऊदी अरब में एनर्जी सुविधाओं पर यमन के हूथी विद्रोहियों के हमलों की निंदा की। भारत ने कहा कि ऐसे हमलों से क्षेत्रीय सुरक्षा कमज़ोर होती है और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में नेविगेशन की आज़ादी को खतरा पैदा होता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल की ये टिप्पणियां भारतीय पक्ष की ओर से पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया थीं। इससे पहले मंगलवार को हूतियों ने कहा था कि उन्होंने एक बड़े ऑपरेशन के तहत दक्षिणी सऊदी अरब में तेल की दिग्गज कंपनी सऊदी अरामको की ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाया है। सऊदी अधिकारियों ने बताया कि इन हमलों के कारण कई तेल प्रतिष्ठानों और यूटिलिटी साइटों पर आग लग गई और 73 लोग घायल हो गए।इसे भी पढ़ें: Houthi विद्रोहियों के हमलों से दहला Saudi Arabia, 73 लोग हुए घायलसऊदी अरब में हूती हमलों का ज़िक्र करते हुए जायसवाल ने कहा कि भारत सऊदी अरब के संप्रभु क्षेत्र पर हुए हमलों, खासकर आम नागरिकों और आर्थिक सुविधाओं को निशाना बनाए जाने की निंदा करता है। उन्होंने कहा कि ऐसे हमले, जो क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को कमज़ोर करते हैं और बाब-अल-मंदेब में नेविगेशन की आज़ादी के लिए खतरा पैदा करते हैं, उन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता। दक्षिणी सऊदी अरब में ऊर्जा से जुड़े अहम इंफ्रास्ट्रक्चर हैं, जिनमें जिज़ान रिफाइनरी भी शामिल है, जो रोज़ाना 4,00,000 बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस कर सकती है। ईरान द्वारा होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने के बाद, सऊदी अरब के ऊर्जा निर्यात के लिए बाब-अल-मंदेब का महत्व बढ़ गया है।इसे भी पढ़ें: Mecca Pact की हवा निकाल रहे हूती, अब सऊदी में घुसकर मारा, एयरपोर्ट-एयरबेस तबाहभारत द्वारा रूस से तेल की खरीद बढ़ाने के बावजूद, सऊदी अरब देश के शीर्ष तीन ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं में बना हुआ है। यमन में ईरान-समर्थित हूथी विद्रोहियों और सऊदी-समर्थित बलों के बीच हाल के दिनों में लड़ाई तेज़ी से बढ़ी है। इन झड़पों को 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए संघर्ष-विराम के बाद से सबसे गंभीर माना जा रहा है; उस संघर्ष-विराम ने आठ साल के भीषण संघर्ष के बाद बड़े पैमाने पर हो रही लड़ाई को रोक दिया था। हूथी विद्रोहियों के लिए बाब-अल-मंदेब एक मुख्य केंद्र रहा है, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाला एक संकरा जलमार्ग है। हूथियों ने जुलाई में सऊदी जहाजों की आवाजाही रोकने (नाकेबंदी) की घोषणा की और बाब-अल-मंदेब के पास सरकार के नियंत्रण वाले इलाकों की ओर बढ़ना शुरू कर दिया।
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