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    भाजपा का हाथ थामने वाले अफसर ही राजनीति में सफल:पार्टी बनाने वाले अधिकारी संघर्ष कर रहे; 2027 में 2 IAS पहली बार चुनाव लड़ेंगे

    9 hours ago

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    यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में 2 IAS और 2 PCS अधिकारी पहली बार चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। पिछले 12 साल में अब तक 14 IAS-IPS सियासत में आ चुके हैं। लेकिन, सफल वही हुए, जिन्होंने सत्ता का हाथ थामा। जिन्होंने नई पार्टी बनाकर अलग रास्ता चुना, वे सियासी दलदल में उलझकर रह गए। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या अफसर से नेता बनने की यह कवायद सिर्फ लाल बत्ती का नया विकल्प है या वाकई व्यवस्था बदलने की कोशिश? शायद यही वजह है कि IAS दिव्या मित्तल के राजनीति में उतरने के ऐलान के बाद सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने चुटकी ली- IAS बनना आसान है, लेकिन चुनाव लड़ना और विधायक बनना मुश्किल…। उनके पास खूब पैसा होगा, इसलिए चुनाव लड़ रही हैं। 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर पूर्व ब्यूरोक्रेट्स खाकी और खादी के फेरबदल में जुट गए हैं। यूपी की राजनीति में अधिकारियों का सक्सेस रेट क्या रहा, आज की संडे बिग स्टोरी में पढ़ते हैं… नौकरी के बाद राजनीति में आने वाले अधिकारियों का पिछले 12 साल में जो ट्रेंड रहा है, उससे 3 तरह की स्थितियां बनीं- राजनीति में सफल होने वाले IAS-IPS गुजरात में PM के करीबी रहे, यूपी में ऊर्जा मंत्री बने राजनीति में जल्द सफल होने वालों की लिस्ट में अरविंद कुमार शर्मा का नाम सबसे ऊपर है। वो 1995 में पहली बार मेहसाणा जिले के डीएम बने। 2001 में जब नरेंद्र मोदी गुजरात के सीएम थे, तब वे उनके कार्यालय में सचिव बनाए गए। 2014 तक वह गुजरात में मोदी के सबसे करीबी अधिकारी रहे। मोदी जब पीएम बने, तो वे भी प्रधानमंत्री कार्यालय आ गए। 2020 में MSME मंत्रालय के सचिव बने। 2021 में VRS ले लिया। 2022 में यूपी में MLC बने। यूपी सरकार में उन्हें ऊर्जा और नगर विकास मंत्री बनाया गया। चर्चा है कि 2027 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं। जनवरी में नौकरी छोड़ी, मार्च में मंत्री बने असीम अरुण यूपी सरकार में समाज कल्याण मंत्री हैं। इनके पिता श्रीराम अरुण भी IPS अधिकारी रहे हैं। असीम अलीगढ़, आगरा और गोरखपुर में लंबे वक्त तक तैनात रहे। वो मुख्यमंत्री के खास अफसर रहे। असीम SPG की क्लोज प्रोटेक्शन टीम में थे। पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की सुरक्षा में रहे। नौकरी के आखिरी वक्त में यूपी डायल-112 के ADG रहे और कानपुर के पहले पुलिस कमिश्नर बने। असीम ने जनवरी, 2022 में नौकरी से VRS ले लिया और कन्नौज सदर की सीट पर भाजपा के टिकट से चुनाव जीता। भाजपा ने उन्हें समाज कल्याण विभाग में राज्य मंत्री बनाया। अगले साल फिर से वह चुनाव में नजर आएंगे। ED में बड़े मामलों की जांच की, नौकरी छोड़ते ही विधायक बने राजेश्वर सिंह ने IIT धनबाद से इंजीनियरिंग की, कानून और मानवाधिकार की पढ़ाई की। PPS से IPS में प्रमोट होने के बाद 2007 में ईडी में पहुंच गए। इसके बाद ईडी के संयुक्त निदेशक बने। 2G स्पेक्ट्रम, अगस्ता वेस्टलैंड, आम्रपाली और गोमती रिवरफ्रंट जैसे चर्चित मामलों की जांच की। नौकरी 11 साल बची थी, लेकिन फरवरी, 2022 में VRS ले लिया। भाजपा के टिकट पर लखनऊ की सरोजनीनगर सीट से चुनाव लड़े और विधायक बने। 2027 में फिर से दावेदार हैं। IPS की नौकरी छोड़ पूर्व PM के बेटे को हराया बागपत जिले के बसौली गांव में जन्मे सत्यपाल सिंह ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से लेकर ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ वोलोंगोंग तक पढ़ाई की। मुंबई में संयुक्त पुलिस आयुक्त रहे। मुंबई पुलिस कमिश्नर बने। इसी पद पर रहते हुए 59 साल की उम्र में इस्तीफा दिया और भाजपा में शामिल हुए। भाजपा के टिकट पर बागपत से सांसद बने। 2017 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री बने। 2019 में दोबारा सांसद बने। 2024 में चुनाव नहीं लड़ा। नौकरी छोड़ने के बाद 10 साल तक राजनीति की। यूपी के DGP रहे, भाजपा ने राज्यसभा सांसद बनाया बृजलाल कई जिलों में पुलिस कप्तान रहे। 2007 में मायावती मुख्यमंत्री बनीं, तब उन्होंने बृजलाल को एडीजी (कानून-व्यवस्था) बनाया था। 2011 में वे यूपी के DGP बन गए। 2015 में रिटायर हुए, तो भाजपा से जुड़ गए। पहले यूपी अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग के अध्यक्ष बने। 2020 में भाजपा ने राज्यसभा सांसद बना दिया। 2026 में उन्हें दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा गया। हरियाणा में पैदा हुए, यूपी में काम किया, यहीं नेता बने पन्ना लाल पुनिया यानी पीएल पुनिया ने लखनऊ यूनिवर्सिटी से पीएचडी की। 1970 में IAS बन गए। यूपी कैडर में अपनी सेवाएं दी। मुलायम सिंह और मायावती की सरकार में वरिष्ठ प्रशासनिक जिम्मेदारियों को निभाया। जब रिटायर हुए तो कांग्रेस जॉइन की। 2009 में बाराबंकी से सांसद बने। 2014 में चुनाव हार गए, तो कांग्रेस ने राज्यसभा सांसद बना दिया। अब फिलहाल राजनीति से दूर हैं। इनके बेटे तनुज पुनिया 2024 में बाराबंकी सीट से कांग्रेस के ही टिकट पर सांसद बने हैं। पार्टी बनाने वाले अधिकारी, जिन्होंने कभी चुनाव नहीं लड़ा पार्टी बनाई, लेकिन कभी चुनाव नहीं लड़ा अमिताभ ठाकुर ने पुलिस विभाग में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं। 2015 में उन्हें मुलायम सिंह यादव ने फोन पर धमकी दी। वीडियो वायरल हुआ, तो अमिताभ को सस्पेंड कर दिया गया। 2021 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी। कहा कि अमिताभ शेष सेवाकाल के लिए योग्य नहीं हैं। अगस्त, 2021 में अमिताभ ठाकुर ने पार्टी बना ली। नाम रखा- आजाद अधिकार सेना। मुख्यमंत्री योगी के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान किया, लेकिन बाद में लड़े नहीं। 2024 में निर्वाचन आयोग ने आजाद अधिकार पार्टी को पंजीकृत किया। अभी तक पार्टी ने कोई चुनाव नहीं लड़ा है। अलग राज्य की मांग करते-करते पार्टी बना ली सुलखान सिंह कई जिलों में एसपी रहे। फिर आईजी लखनऊ, एडीजी पुलिस प्रशिक्षण निदेशक और फिर 2017 में यूपी के डीजीपी बन गए। इसी साल वह रिटायर भी हो गए। 6 साल बाद 2023 में उन्होंने पार्टी बना ली। नाम रखा- बुंदेलखंड लोकतांत्रिक पार्टी। सुलखान सिंह यूपी और एमपी के 15 जिलों को मिलाकर एक अलग बुंदेलखंड राज्य बनाने की मांग कर रहे थे। 2024 में प्रत्याशी उतारने की बात कही, लेकिन आखिरी वक्त में प्रत्याशी नहीं उतारे। अभी भी वह अलग राज्य की मांग करते हैं। हालांकि, पार्टी ने अभी तक कोई कामयाबी नहीं हासिल की है। जो चुनाव लड़े, लेकिन बुरी तरह हारे पार्टी बनाकर तीन चुनाव लड़े, एक बार तो सिर्फ 643 वोट मिले डॉ. चंद्रपाल यूपी में काम करने के बाद केंद्र में प्रमुख सचिव बने। 2008 में रिटायर हुए और 2009 में आदर्श समाज नाम से पार्टी बना ली। खुद आगरा की सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ा। उस चुनाव में चंद्रपाल को 1,093 वोट मिले। यह कुल पड़े वोट का 0.17% था। 2014 में चंद्रपाल ने कोई चुनाव नहीं लड़ा। 2019 में फिर से उसी सीट से उतरे, इस बार 2802 वोट मिले। 2024 में चंद्रपाल को सिर्फ 643 वोट मिले। करीब 17 साल से चंद्रपाल की पार्टी को कोई सफलता नहीं मिल सकी। चुनाव हारे, पार्टी बनाई, अब भाजपा का दामन थामा राम बहादुर यूपी कैडर के IAS अधिकारी रहे हैं। गोंडा में डीएम और फिर लखनऊ विकास प्राधिकरण में उपाध्यक्ष रहे। मायावती के करीबी माने जाते हैं। इसीलिए रिटायरमेंट के बाद 2014 में पार्टी ने मोहनलालगंज की सुरक्षित सीट से प्रत्याशी बनाया। लेकिन, चुनाव हार गए। 2017 में मोहनलालगंज की विधानसभा सीट से हार गए। इसके बाद उन्होंने नागरिक एकता पार्टी बना ली। 2019 में गोंडा सीट से उतरे, लेकिन चुनाव हार गए। 2022 में वह भाजपा में शामिल हो गए। 2025 में यूपी ओलंपिक एसोसिएशन का एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट और गोंडा के प्रभारी बनाए गए। 3 चुनाव हारे, 81 साल की उम्र में शादी कर ली एसआर दारापुरी को यूपी कैडर मिला। 2003 में IG के पद से रिटायर हुए। इसके बाद मानवाधिकार, दलित अधिकार और आदिवासी समुदाय के लिए काम किया। 2009, 2014, 2019 में सोनभद्र की रॉबर्ट्सगंज लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हर बार टॉप 5 से बाहर रहे। 2019 में उन्हें सबसे ज्यादा 11,032 वोट मिले थे। इसके बाद उन्होंने राजनीति छोड़ दी। 2024 में उन्होंने 81 साल की उम्र में अपने से 40 साल छोटी लखीमपुर खीरी की एक आशा वर्कर से शादी कर ली। जहां डीएम रहे, वहां चुनाव लड़ा, 10वें नंबर पर रहे अयोध्या में जब 1992 में आंदोलन हुआ, तब विजय शंकर फैजाबाद के डीएम थे। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद प्रभावित मुस्लिम परिवारों के पुनर्वास में भूमिका निभाई। 2007 से 2012 के बीच मायावती की सरकार में वह प्रमुख सचिव रहे। हालांकि, 2011 में उन्हें पद से हटाकर राजस्व बोर्ड में भेज दिया गया। यूपी के भ्रष्टतम IAS अधिकारी की लिस्ट जारी करके उन्होंने चर्चा बटोरी थी। 2015 में रिटायरमेंट के बाद उन्होंने लोक गठबंधन पार्टी बना ली। हिमाचल प्रदेश समेत कुछ राज्यों में दौरा किया। प्रत्याशी उतारे, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। 2019 के लोकसभा चुनाव में विजय शंकर खुद अयोध्या लोकसभा सीट पर उतरे। उन्हें महज 2,056 वोट मिले थे। इसके बाद विजय शंकर ने कोई और चुनाव नहीं लड़ा। सपा सरकार में मुख्य सचिव रहे, क्रॉस वोटिंग के चलते सांसद नहीं बन पाए आलोक रंजन केंद्र सरकार के रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव रहे। 2012 में अखिलेश यादव सीएम बने, तो उनकी सरकार में प्रमुख सचिव और फिर मुख्य सचिव रहे। मेट्रो और लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे जैसी परियोजना पर काम करवाया। रिटायर हुए, तो सपा के मुख्य सलाहकार बन गए। 2024 में सपा ने उन्हें राज्यसभा कैंडिडेट बनाया, लेकिन क्रॉस वोटिंग के चलते हार गए। इस बार उन्हें कैंडिडेट नहीं बनाया गया। आलोक रंजन इस वक्त सपा के ही साथ हैं, 2027 के लिए रणनीति बना रहे हैं। अब वो IAS, जो विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं… जहां आजादी के बाद पानी पहुंचाया, वहीं से दावेदारी IAS दिव्या मित्तल हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली हैं। 2013 में IAS बनीं, तो यूपी कैडर मिला। कई जिलों में डीएम रहीं, लेकिन मिर्जापुर का कार्यकाल खास रहा। यहां लहुरियादह गांव पानी के संकट से जूझ रहा था। उन्होंने यहां पानी पहुंचा दिया। जिस दिन पानी का उद्घाटन किया, उसी दिन ट्रांसफर हो गया। इसी साल अगस्त महीने में उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया। 29 सितंबर को राजनीति में उतरने का ऐलान कर दिया। अभी किसी पार्टी में शामिल होने की बात नहीं की, लेकिन पार्टियां उन्हें अपने साथ जोड़ने के लिए इच्छा जता चुकी हैं। संभावना है कि दिव्या मिर्जापुर से चुनाव लड़ सकती हैं। लापरवाही के चलते सस्पेंड हुए, चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे जौनपुर के अभिषेक सिंह के पिता कृपाशंकर सिंह भी IPS रहे हैं। अभिषेक की पत्नी दुर्गा शक्ति नागपाल भी IAS हैं। 2022 के चुनाव में अभिषेक पर्यवेक्षक बनाए गए थे। सरकारी गाड़ी के साथ सोशल मीडिया पर पोस्ट की, तो निर्वाचन आयोग ने जिम्मेदारी से हटा दिया। 2023 में वह फिर से ड्यूटी से अनुपस्थित रहे। इसके चलते सस्पेंड कर दिए गए। उन्होंने इसी साल अपना इस्तीफा केंद्र सरकार को भेज दिया। 2024 से वह समाज सेवा से जुड़े। संभावना जताई जाती रही कि वह 2024 में चुनाव लड़ेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 2027 में वह चुनाव में उतर सकते हैं। हालांकि, किस पार्टी से, यह अभी तक तय नहीं है। 7 साल पहले भाजपा में शामिल हुए, अभी चुनाव नहीं लड़े डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला पुलिस विभाग में तमाम पदों पर काम करने के बाद पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के अध्यक्ष बने। अगस्त, 2018 में मुख्यमंत्री को पत्र लिखा। कहा- रिटायरमेंट के बाद भाजपा के चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभानी है। 2018 में ही रिटायरमेंट हुआ। अगले साल भाजपा में शामिल हो गए। अभी तक भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया है। 2 PCS अधिकारी, जो लड़ने की तैयारी कर रहे ------------------ ये पढ़ें - पुलिस-होमगार्ड भर्ती की दौड़ में 20 दिन में 7 मौतें: दिल ने साथ छोड़ा या गर्मी ने जान ली; कौन है अभ्यर्थियों की मौत का जिम्मेदार यूपी पुलिस और होमगार्ड भर्ती की दौड़ के दौरान या उसके बाद अब तक 7 अभ्यर्थियों की मौत हो चुकी है। मेरठ के कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम में होमगार्ड भर्ती की दौड़ के बाद 11 अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ी। 20 सितंबर तक 3 की मौत हो गई। इसके बाद 6 अक्टूबर तक लखनऊ, मुरादाबाद और गाजियाबाद में 4 और अभ्यर्थियों की मौत हुई। गर्मी और उमस हार्ट अटैक की वजह कैसे बन सकती है? प्रोफेशनल एथलीट और डॉक्टर इसकी क्या वजह बताते हैं? पढ़िए यूपी एक्सप्लेनर में…
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