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    गोरखपुर में स्वास्थ्य-शिक्षा, पेयजल सुविधाओं की जुटा रहे जानकारी:जनगणना की शुरू हुई तैयारी; विकास की योजनाएं बनाने में आसानी होगी

    12 hours ago

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    जनगणना के दूसरे चरण में घर-घर जाकर हर तरह की जानकारी दर्ज की जाएगी। उससे पहले ही गोरखपुर शहर व गांवों में अलग-अलग टीमें लगाकर वहां मौजूद सुविधाओं की जानकारी ली जा रही है। इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, सड़क, बिजली, बैंकिंग, परिवहन, संचार और स्वच्छता जैसी सुविधाओं की क्या स्थिति है, इसे दर्ज किया जाएगा। इसके साथ ही कृषि, उद्योग, रोजगार, सिंचाई और ईंधन से जुड़ी जानकारी भी जुटाई जा रही है। सर्वे की जिम्मेदारी लेखपालों को दी गइ है। फील्ड सर्वे 16 अगस्त से 15 सितंबर तक कराना था लेकिन प्रशिक्षण का काम समय से पूरा होने के बाद इसे बुधवार से ही शुरू करा दिया गय है। यह जानकारी जुटाने के लिए जिला जनगणना हस्त पुस्तिका (DCHB) तैयार की गई है। गांव के लिए विलेज डायरेक्टरी व शहर के लिए टाउन डायरेक्टरी तैयार की जाएगी। दोनों क्षेत्रों की जानकारी मोबाइल एप के जरिए भरी जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से DCHB-2027 मोबाइल एप उपलब्ध कराया गया है। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर भविष्य की विकास परक एवं कल्याणकारी योजनाओं के लिए नीतियों का निर्माण हो सकेगा। जानिए क्या है DCHB जनगणना के नोडल अधिकारी एवं अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व जयप्रकाश ने बताया कि DCHB जिले की सामाजिक, आर्थिक और आधारभूत स्थिति का महत्वपूर्ण दस्तावेज होगी। इसमें गांव और नगर स्तर पर उपलब्ध सुविधाओं से लेकर जनसंख्या और अन्य जरूरी आंकड़ों का विस्तृत विवरण दर्ज किया जाएगा। जिले में ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के लिए अलग-अलग हस्त पुस्तिका तैयार की जाएगी। जिला जनगणना हस्त पुस्तिका दो भागों में प्रकाशित होगी। पहले भाग में जिले का इतिहास, भौगोलिक स्थिति, प्रशासनिक व्यवस्था, कृषि, उद्योग, परिवहन और नागरिक सुविधाओं की जानकारी शामिल होगी। दूसरे भाग में गांव और नगरवार जनसंख्या, परिवार, लिंगानुपात समेत अन्य सांख्यिकीय आंकड़े दिए जाएंगे। इसमें संबंधित मानचित्र भी शामिल किए जाएंगे। इस दस्तावेज को भविष्य की विकास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उपलब्ध सुविधाओं और उनकी स्थिति की प्रमाणिक जानकारी मिलने से जरूरत वाले क्षेत्रों की पहचान आसान होगी। इसके आधार पर स्कूल, अस्पताल, सड़क, पेयजल, बैंक और अन्य नागरिक सुविधाओं के विस्तार की योजना बनाने में मदद मिलेगी। शोध और नीति निर्माण के अलावा निवेश तथा औद्योगिक विकास के लिए भी यह उपयोगी आधार उपलब्ध कराएगी। गांव और शहरों के संतुलित विकास की योजनाएं तैयार करने में भी इसके आंकड़े महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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