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    कानपुर में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को अफसर का बंगला अलॉट:टेंडर घोटाले की जांच आगे बढ़ी, नगर निगम के भ्रष्ट अफसर भी निशाने पर

    4 hours ago

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    कानपुर नगर निगम में टेंडर घोटाले में जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। SIT की जांच में प्रारंभिक रूप में कई खुलासे हुए हैं। इसमें अफसरों और कर्मचारियों पर आय से अधिक संपत्ति की भी बात सामने आई है। नगर निगम में भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की चल–अचल संपत्ति की अब विजिलेंस जांच कराई जाएगी। भ्रष्टाचार में लिप्त अफसरों के सबूत मिलने के बाद यह आदेश पुलिस कमिश्नर ने दिए है। टेंडर घोटाले से जुड़े ठेकेदारों, पार्षदों और अन्य लोगों की संलिप्तता की जांच तेज की गई है। इस गठजोड़ को लेकर भी जांच टीम के हाथ कई सबूत लगे हैं। चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी को राजपत्रित अधिकारी के 2 बंगले आवंटित जांच में सामने आया कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी विनोद कुमार को राजपत्रित अधिकारी के दो बंगले भी आवंटित थे। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पूल के बाहर के ठेकेदारों को धमकाने, उनपर दबाव बनाने का काम करता था। जिसके इनाम में उसे दो बंगले आवंटित किए गए थे। ठेकेदारों पर दबाव बनाने का काम करता था पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने बताया कि जांच में सामने आया है कि संयुक्त वाहन चालक कर्मचारी संघ का अध्यक्ष और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी विनोद कुमार भी सिंडीकेट का मेंबर है। यह भी सफेदपोशों की मदद से ठेकेदारों पर दबाव बनाने का काम करता था। जांच में सामने आया है कि विनोद कुमार के नाम दो सरकारी बंगलों का एलॉटमेंट है, जबकि यह सिर्फ गजटेड ऑफिसर्स को ही दिया जा सकता है। इसमें से एक बंगला नगर निगम जोन 5 गोविंद नगर ऑफिस के अंदर बना है, विनोद अपने परिवार के साथ यही रहता है। पुलिस कमिश्नर ने बताया- एसआईटी जांच में सामने आया है कि नगर निगम में करोड़ों रुपये की मशीनों को खरीदा गया, जिसे सफाई, निर्माण कार्य व अन्य कामों में इस्तेमान करना था, लेकिन इसका उपयोग आज तक नहीं किया गया। इसी तरह स्पोर्ट्स से जड़ा सामान तो सिर्फ कागजों में ही खरीदा गया। यह सामान फिजिकल रूप में अफसर दिखा नहीं सके हैं। पार्षद वेलफेयर एसो. के सदस्य भी संदिग्ध पुलिस कमिश्नर ने बताया- पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन से जुड़े सदस्यों (पार्षदों) की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच में सामने आया है कि एसोसिएशन में जो एससी-एसटी पार्षद हैं, वह ठेकेदारों को धमकाने का कार्य करते थे. अपने चहेते ठेकेदारों को काम दिलाने के लिए एससी-एसटी एक्ट का मुकदमा दर्ज कराने की भी धमकी दी जाती थी, जिससे डर कर ठेकेदार खुद ही काम सरेंडर कर देते थे। इनपर दर्ज हुई है एफआईआर SIT में यह लोग कर रहे जांच एडीसीपी सेंट्रल डॉ. अर्चना सिंह के नेतृत्व में 4 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया है. जिसमें एडीसीपी समेत एसीपी स्वरूप नगर ज्योति श्री, फजलगंज इंस्पेक्टर धनंजय पांडेय व स्वरूप नगर इंस्पेक्टर देवेंद्र सिंह शामिल हैं।
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