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    सपा में दावेदारों से नहीं लेंगे आवेदन:सर्वे के आधार पर ऊपर से तय होंगे प्रत्याशी

    1 hour ago

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    विधानसभा चुनाव की तैयारी में सभी पार्टियां जुट गई हैं। हर पार्टी से अपने अनुकूल विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशी भी नजर आने लगे हैं। भाजपा की तरह ही सपा में भी आवेदकों की भरमार है। यही कारण है कि प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में पार्टी ने बदलाव किया है। इस बार स्थानीय स्तर से किसी से आवेदन नहीं मांगा जा रहा है। सभी दावेदारों को तैयारी करने को कहा गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्तर से हर विधानसभा सीट पर सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के मुताबिक जो मजबूत पड़ेगा, उसे ऊपर से टिकट दे दिया जाएगा। सपा में संगठन के पदाधिकारियों को भी यह संदेश दिया जा चुका है। पार्टी सूत्रों की मानें तो इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है लेकिन इसी आधार पर इस बार टिकट का वितरण होना है। वर्तमान में सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर जिताऊ प्रत्याशी पर ही दांव लगाने की तैयारी है। जानिए सर्वे में किन बातों को किया जा रहा शामिल सपा के एक पदाधिकारी ने बताया कि सर्वे में हर विधानसभा क्षेत्र की जातीय गणित का ध्यान रखा जा रहा है। यादव व मुस्लिमों को अपना कोर वोट मानने वाली यह पार्टी उस समीकरण का पता लगाने में जुटी है, जिसके जरिए संबंधित विधानसभा क्षेत्र में जीत की संभावना अधिक रहेगी। यदि पिछड़ा वर्ग से किसी प्रत्याशी को उतारने से यह तलाश पूरी हो जाएगी तो उसपर दांव लगाया जाएगा। यदि सवर्ण प्रत्याशी से मदद मिली तो उसका चयन किया जाएगा। यह सर्वे सीधे राष्ट्रीय अध्यक्ष की निगरानी में होगा और उन्हीं के पास रिपोर्ट भी जाएगी। गोरखपुर बस्ती मंडल में कई दावेदार सीटें बदल चुके हैं गोरखपुर-बस्ती मंडल में अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में कई ऐसे दावेदार नजर आ रहे हैं जो इस बार अपनी पुरानी सीट से चुनाव नहीं लड़ना चाहते। पिछले कुछ चुनावों के आंकड़ों एवं सपा के मजबूत वोट बैंक को आधार बनाकर वे वहीं से तैयारी में जुटे हैं। कई नेताओं ने जिला भी बदल लिया है। जिससे स्थानीय नेताओं से उनका टकराव होने की संभावना भी बन रही है। टकराव रोकने में भी प्रभावी होगा निर्णय वरिष्ठ पत्रकार पीएन राय बताते हैं कि ऊपर से प्रत्याशी तय करने की घोषणा के पीछे अंदरूनी टकराव रोकने का इरादा भी है। पिछले चुनाव में अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में दावा कर चुके नेता दूसरी सीटों पर जोर-आजमाइश कर रहे हैं। वहां पहले से मौजूद नेताओं से अंदरखाने उनका टकराव भी चल रहा है। सभी से आवेदन लेने के बाद जब एक को छोड़कर अन्य को निराशा हाथ लगेगी तो उसका आरोप स्थानीय संगठन पर भी जा सकता है। यही कारण है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सीधे तौर पर ऊपर से ही प्रत्याशी चयन का संदेश दिया है, जिससे किसी प्रकार का टकराव स्थानीय स्तर पर न रहे।
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