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    देवबंद दारुल उलूम में शिव मंदिर होने का दावा:सहारनपुर में ललित शर्मा बोले-14 फीट नीचे शिवलिंग मिलेगा, नहीं मिले तो फांसी दे देना

    6 hours ago

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    सहारनपुर में हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ताओं ने दारुल उलूम परिसर के नीचे शिव मंदिर होने के दावा किया है। गुरुवार को हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। संगठन के पदाधिकारियों ने दारुल उलूम परिसर में वैज्ञानिक जांच और खुदाई कराने की मांग की। हिंदू रक्षा दल के उत्तराखंड प्रदेशाध्यक्ष ललित शर्मा ने दावा किया कि दारुल उलूम की मस्जिद के नीचे 14 फीट गहराई में प्राचीन शिव मंदिर मौजूद है। अगर खुदाई में मंदिर नहीं मिले तो मुझे फांसी दे दी जाए। संगठन ने मंदिर के अवशेष मिलने पर उन्हें संरक्षित करने और कानूनी कार्रवाई की मांग की। सहारनपुर डीएम को ज्ञापन सौंपा। वहीं, ललित शर्मा ने सांसद इकरा हसन और समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधते हुए जातीय राजनीति करने के आरोप लगाए। अब विस्तार से जानिए पूरा मामला…. देवबंद में स्थित दारुल उलूम देवबंद देश का प्रमुख इस्लामिक शिक्षण संस्थान माना जाता है। इसकी स्थापना 30 सितंबर 1866 को हुई थी। यह संस्थान अपने धार्मिक शिक्षण और समय-समय पर जारी होने वाले फतवों को लेकर चर्चा में रहता है। अब दारुल उलूम को लेकर एक नया मामला सामने आया है। हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि दारुल उलूम परिसर के नीचे प्राचीन शिव मंदिर है। कार्यकर्ताओं ने सहारनपुर डीएम ऑफिस के बाहर प्रदर्शन किया और प्रशासन से वैज्ञानिक जांच और खुदाई कराने की मांग की। 14 फीट नीचे शिव मंदिर होने का दावा हिंदू रक्षा दल के उत्तराखंड प्रदेशाध्यक्ष ललित शर्मा ने कहा- मुझे स्थानीय लोगों और अन्य स्रोतों से जानकारी मिली है कि दारुल उलूम की मस्जिद के नीचे करीब 14 फीट गहराई में शिव मंदिर है। वहां शिवलिंग और मंदिर के अवशेष मौजूद हैं। ललित शर्मा ने कहा कि प्रशासन को तुरंत दारुल उलूम परिसर की खुदाई करानी चाहिए। अगर खुदाई में मंदिर नहीं मिलता तो मुझे फांसी दे दी जाए। यह मामला करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है। पूरे परिसर की वैज्ञानिक तरीके से जांच कराई जानी चाहिए। अगर खुदाई में किसी प्राचीन मंदिर या हिंदू धार्मिक अवशेष के प्रमाण मिलते हैं तो उन्हें संरक्षित किया जाए और कानूनी कार्रवाई की जाए। पीआईएल दाखिल करने की कही बात ललित शर्मा ने कहा- अगर जांच में मंदिर के अवशेष मिलते हैं तो हम अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। इस मामले में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की जाएगी और सरकार से मंदिर को ‘मुक्त कराने’ की मांग की जाएगी। ललित शर्मा ने कहा- देवबंद मस्जिद के नीचे जो हमारे शिव को कैद किया गया है, उन्हें आजाद कराया जाए। उनके बयान के दौरान मौके पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी भी की। सांसद इकरा हसन और सपा पर भी लगाए आरोप ललित शर्मा ने सांसद इकरा हसन और समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में एक मामले में इकरा हसन केवल राजनीति करने के उद्देश्य से पहुंची थी। साथ ही उन्होंने पुलिस प्रशासन के साथ कथित अभद्र व्यवहार को लेकर भी टिप्पणी की। ललित शर्मा ने कहा कि पीड़ित मां इंसाफ मांगने आई थी, लेकिन इकरा हसन वहां राजनीति करने पहुंचीं। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों का सम्मान किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी पर जातीय और सामाजिक विभाजन की राजनीति करने का आरोप लगाया। जातीय संघर्ष कराकर चुनाव जीतना चाहती है सपा ललित शर्मा ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी अलग-अलग समुदायों को आपस में लड़ाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी समाज में जातीय तनाव पैदा कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा एक समुदाय को दूसरे समुदाय के खिलाफ खड़ा करने की राजनीति करती है और 2027 का चुनाव जातीय संघर्ष के सहारे जीतना चाहती है। 156 साल पुराना है दारुल उलूम एक लाख से ज्यादा फतवे जारी कर चुका दारुल उलूम इस्लामी तालीम के बाद फतवों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध दारुल उलूम से 17 साल में ऑनलाइन 1 लाख से ज्यादा फतवे जारी किए गए हैं। दारुल उलूम में साल 2005 में फतवा ऑनलाइन विभाग स्थापित किया था। इसके बाद देश-विदेश में बैठे लाखों लोगों ने दारुल उलूम के मुफ्तियों से ऑनलाइन सवाल करना शुरू कर दिया था। डाक से दारुल उलूम के इफ्ता विभाग में लेटर आते थे। 35 हजार फतवे उर्दू और करीब 9 हजार फतवे अंग्रेजी भाषा में वेबसाइट पर अपलोड किए गए हैं। 8 फरवरी, 2022 को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) और सहारनपुर के DM ने अगले आदेश तक दारुल उलूम देवबंद की वेबसाइट बंद कर दी थी। दारुल उलूम देवबंद ने फतवा जारी कर कहा था कि गोद लिए गए बच्चे संपत्ति के मामले में कानूनी वारिस नहीं हो सकते। जिस पर NCPCR ने कहा था कि यह अवैध है, क्योंकि यह देश के कानून के खिलाफ है। अब आपको दारुल उलूम से मिलने वाली तालीम के बारे में बताते हैं... मौलवी की पढ़ाई 8 साल में दारुल उलूम में मौलवी और मुफ्ती की डिग्री मिलती है। मौलवी की पढ़ाई 8 साल में पूरी होती है। इनमें कक्षा 1 से कक्षा 7 तक पढ़ाई होती है। 8वें साल में दौर-ए-हदीस की पढ़ाई पूरी होती है। इसके बाद मौलवी की डिग्री मिलती है। इसके बाद मुफ्ती की डिग्री 1 साल की होती है। खास बात यह है कि मौलवी कोई भी फतवा जारी नहीं कर सकता है। मगर, मुफ्ती धार्मिक जानकारी रखता है, तो वह फतवा जारी कर सकता है। ------------------------------ ये खबर भी पढ़ें… यूपी में महंगाई भत्ता 2% बढ़ाकर 60% किया:28 लाख कर्मचारी-पेंशनर्स को फायदा, जनवरी-2026 से एरियर मिलेगा यूपी सरकार ने गुरुवार (21 मई) को राज्य कर्मचारियों और पेंशनर्स का महंगाई भत्ता (DA) 2% बढ़ा दिया। अब 58% की जगह 60% महंगाई भत्ता मिलेगा। प्रदेश में 16 लाख कर्मचारी और 12 लाख पेंशनर्स हैं। यानी, कुल 28 लाख कर्मचारियों को इसका फायदा मिलेगा। पढ़ें पूरी खबर…
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