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    गाजियाबाद में पकड़े तेंदुए को सहारनपुर के जंगल में छोड़ा:25 फरवरी को स्कूल में दिखा था, 7 घंटे तक चला ऑपरेशन

    2 hours ago

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    गाजियाबाद में पकड़े गए तेंदुए को गुरुवार को सहारनपुर के शिवालिक के जंगल में छोड़ दिया गया। उसे बुधवार को ही गोविंदपुरम में पकड़ लिया गया था। वह पहली बार ग्रीन फील्ड पब्लिक स्कूल में देखा गया था। इसकी सूचना वन विभाग को दी गई थी। वन विभाग ने उसे पकड़ने के लिए 7 घंटे से अधिक देर तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया था। तब जकर उसे पकड़ा जा सका।गाजियाबाद और मेरठ की टीम ने उसका मेडिकल परीक्षण किया। होश में आने पर उसे मीट खिलाया लेकिन तेदुएं ने नहीं खाया। सिर्फ 2 बार पानी पिया। तेंदुआ पिंजरे में भी गुर्राता रहा। सुबह से लेकर तेंदुए के पकड़े जाने तक करीब 10 घंटे तक गोविंदपुरम इलाका पूरा दहशत में रहा। आसपास के स्कूलों की भी छुट्‌टी की गई। लोगों को डर था कि कहीं दीवार फांदकर बाहर निकलकर वह हमला न कर दे। लोगों को अंदेशा है कि हिंडन नदी के किनारे घने जंगल से वह शहर में आया होगा। पहले सड़क पर घूमा फिर स्कूल में घुसा गाजियबाद में हापुड़ रोड गोविंदपुरम पुलिस चौकी के सामने से करीब 1200 मीटर दूर 4 मंजिला ग्रीन फील्ड पब्लिक स्कूल है। बुधवार तड़के तेंदुआ 5 बजकर 15 मिनट पर गोविंदपुरम की सड़क पर घूमते हुए सीसी टीवी में कैद हुआ। उसके बाद वह करीब 9 फीट ऊंची दीवार को फांदकर स्कूल में जा घुसा। सबसे पहले वहां गार्ड ने देखा, फिर सीसी टीवी फुटेज में कैद हुआ। आनन फानन में स्कूल की प्रधानाचार्य ने परीक्षा कैंसिल करते हुए छुट्‌टी घोषित कर दी। सुबह 9 बजे डीएफओ ईशा तिवारी 22 सदस्य टीम के साथ मौके पर पहुंची। मेरठ से भी टीम और डॉक्टर बुलाए गए। सैकड़ों की भीड़ और स्कूल के बाहर जमा हो गई। 7 घंटे पुलिस ने गोविंदपुरम की मुख्य रोड पर बैरियर लगाकर वाहनों को डायवर्ट किया। बुधवार शाम 4 बजे तेंदुए को बेहोश कर पिंजरे में कैद किया गया। होश में आते ही गुर्राने लगा वन विभाग के अफसरों के अनुसार नर तेंदुआ का वजन करीब 75 किलो के आसपास पाया गया। जिसका शरीर पूरा आकार में था। जो शरीर में जवान था, जिसकी उम्र जांच में ढाई साल से 3 साल के बीच होनी पाई गई। जैसे ही होश में आया तो वन विभाग की टीम और डॉक्टरों ने उसे पहले पानी पिलाया। 2 बार में तेंदुए ने पानी पिया, उसके बाद खाने में मीट दिया गया, लेकिन डरी और घबराई हालत में तेंदुए ने मीट नहीं खाया। डॉ सौरभ ने टीम के साथ इसका मेडिकल परीक्षण किया। कहीं जख्म के निशान तो नहीं है, बॉडी पर चोट तो नहीं लगी। ब्लीडिंग तो नहीं हो रही, पंजों में जख्म तो नहीं हैं। कई बार पंजों में कांटा लगने से जख्म हो जाते है, या कूदते समय जख्मी हो जाता है। लेकिन वह मेडिकल परीक्षण में फिट और दौड़ने के लिए उपयुक्त पाया गया। होश में आने के बाद वह गुर्राने लगा, जिसकी गुर्राट से वन विभाग के कर्मचारी भी पूरी तरह से अलर्ट रहे। पिंजरे से छोड़ने के वक्त निर्देश दिए गए थे कोई वीडियो न बनाए कई बार वह हमला कर देता है। इसलिए छोड़ा गया शिवालिक के जंगल में डीएफओ ईशा तिवारी ने बताया कि तेंदुए को रात में के अंधेरे में नहीं छोड़ा जाता है। वेटेनरी डॉक्टरों की टीम ने परीक्षण करने के बाद उसे फिट पाया। जिसके बाद आज सुबह 9 बजे सहारनपुर जिले में शिवालिक के जंगल में छोड़ा गया है। यह 33 हजार हेक्टेयर का जंगल ऐरिया है। यह जानवरों के लिए नेचरल जंगल है। चारों तरफ खैर और शीशम के घने जंगल भी हैं। पास में कोई भी इतना बड़ा जंगल एरिया नहीं है जहां पर छोड़ा जा सके। रात में ही वन विभाग की टीम पिंजरे में लेकर तेंदुए को सहारनपुर पहुंची थी। पिंजरे से निकलते ही वह 100 मीटर बहुत तेजी से दौड़ा, फिर रुका चारों तरफ देखा और फिर जंगल में चला गया।
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